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1.
जलवायु परिवर्तन से 2070 तक भारत की जीडीपी को 24.7% नुकसान की आशंका एशियाई विकास बैंक का अनुमान है न है कि जलवायु परिवर्तन से 2070 तक भारत की जीडीपी को 24.7 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले करीब 5.10 करोड़ लोगों पर सबसे पहले खतरा है। यहां ग्लेशियल झील टूटने से बाढ़ आने की घटनाएं हो चुकी है, जो भविष्य में बढ़ेंगी। इससे पानी की कमी भी होगी और मैदानी इलाकों तक असर पड़ेगा क्योंकि एशिया के करीब 130 करोड़ लोग पेयजल के लिए इन पर आश्रित हैं।
2.
शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 में महिलाओं के लिए 2.67 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। केंद्र सरकार ने दूसरे चरण की शुरुआत करते हुए 3.53 लाख घरों के निर्माण को मंजूरी दी, जिनमें 75 प्रतिशत आवास एकल महिलाओं अथवा ऐसी महिलाओं के नाम पर होगी, जिनके पति दिवंगत हो चुके हैं। पीएम आवास योजना 2.0 के तहत लाभार्थियों को निर्माण में मदद और साझेदारी में किफायती आवास के अंतर्गत 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन आवासों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की गई है। इसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं।
3.
भारत में विश्व की कुल आबादी का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है, जबकि देश में पीने योग्य जल संसाधनों का मात्र चार प्रतिशत भाग ही उपलब्ध है। जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों में 120वें स्थान पर है। देश के लगभग 70 प्रतिशत जल स्रोत प्रदूषित हैं। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2050 तक हमारी जल की आवश्यकता 1,180 अरब घन मीटर होने की संभावना है। देश में जल की उपलब्धता वर्तमान में 1,137 अरब घन मीटर है। 2030 तक देश की 40 प्रतिशत आबादी को पीने योग्य स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होगा।
4.
नासा के जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन की एक हालिया खोज ने खगोल विज्ञान की दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी इसने पाया कि इन प्राचीन मंदाकिनियों में से करीब दो-तिहाई दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घूर्णन कर रही हैं, जबकि केवल एक-तिहाई वामावर्त (विपरीत दिशा में) घूर्णन रही हैं। यह खोज इसलिए हत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक विज्ञानी मानते थे कि ब्रह्मांड में ऐसी गतियों में किसी 'विशेष दिशा' का वर्चस्व नहीं होना चाहिए।
5.
उपग्रहों की मदद से तेज रफ्तार वाला इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए भारत की दो निजी दूरसंचार कंपनियों ने एलन मस्क की स्टारलिंक कंपनी से समझौता किया है। इससे उम्मीद जगती है कि अमीर-गरीब के बीच की डिजिटल खाई को रातोंरात समाप्त करते हुए देश का गरीब-मध्यवर्ग व्यापक सुविधाएं पा सकेगा। ये उम्मीदें बेशक आसमानी हैं, लेकिन इससे गरीबों और विकास के मामले में उपेक्षित रहे लोगों की जिंदगी में क्या वास्तव में बदलाव आएगा और उनकी जीवनशैली भी उन्नत होने की संभावना है? इस तथ्य को भी समझा जाना चाहिए
6.
भारत में पहली बार कोयला उत्पादन 100 करोड़ टन के आंकड़े को पार कर गया है। लोकसभा में कोयला मंत्री ने पूर्व में बताया था कि वर्ष 2023-24 में भारत का कोयाला उत्पादन 99.27 करोड़ टन था जबकि इसके पिछले वर्ष 2022-23 में 83.19 करोड़ टन रहा था। कोयला उत्पादन के मामले में वर्ष 2025-26 में 119 करोड़ टन का लक्ष्य रखा गया है। जबकि देश में ताप बिजली घरों की जरूरत को देखते हुए वर्ष 2030 तक 150 करोड़ टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
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