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News Highlights provides you with the best compilation of the Daily News Highlights taking place across the globe: National, International, Sports, Science and Technology, Banking, Economy, Agreement, Appointments, Ranks, and Report and General Studies
1.
अमेरिका की शीर्ष खुफिया एजेंसी नेशनल इंटेलिजेंस की निदेशक तुलसी गबार्ड ने अपनी भारत यात्रा के दौरान न सिर्फ कारोबारी प्रतिबंधों की वजह से भारत के साथ रिश्तों में आई असहजता को दूर करने की कोशिश की, बल्कि नई दिल्ली से उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियों से बिदक रहे पुराने मित्र राष्ट्रों को भी मित्रता का संदेश भेजा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट' (अमेरिका प्रथम) नीति का मतलब 'अमेरिका अलोन' (सिर्फ अमेरिका) नहीं है। विदेश मंत्रालय की तरफ से आयोजित रायसीना डायलाग के एक सत्र को संबोधित करते हुए गबार्ड ने कहा अमेरिका भारत के साथ एक बेहद मजबूत सुरक्षा साझेदारी स्थापित करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका संबंध प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में और प्रगाढ़ होंगे।
2.
मतदाता पहचान पत्रों में गड़बड़ी के आरोपों से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने देशभर के मतदाता पहचान पत्रों (ईपिक) को आधार से जोड़ने का अहम फैसला लिया है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम शुरू करने की योजना बनाई है। वर्तमान में आयोग के पास 66 करोड़ से अधिक मतदाताओं के आधार उपलब्ध हैं, जिन्हें मतदाता पहचान पत्रों से जोड़ने के लिए मतदाताओं ने स्वैच्छिक रूप से उपलब्ध कराया है।
3.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 13 हजार करोड़ की लागत से 68 लाख से अधिक कैंसर रोगियों का इलाज किया गया है, जिनमें से 75.81 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण से हैं।
4.
सीमा पार आतंकवाद पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नीदरलैंड के रक्षा मंत्री रुबेन ब्रेकेलमैन्स से आग्रह किया कि डच कंपनियां पाकिस्तान को हथियार, मंच व तकनीक देना बंद करें। इनसे पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को भारी नुकसान पहुंचाया है।
5.
शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों पर आबादी का बोझ तो अधिक है, लेकिन वित्तीय स्थिति या अधिकारों की बात करें तो ग्रामीण निकाय हाशिए पर पड़े हैं। अब जब विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर गांवों की आवश्यकता पर बल दिया जाता है तो इस पर वृहद अध्ययन कर विशेषज्ञों ने भी वो राह दिखाने का प्रयास किया है, जिस पर चलकर इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। पंचायतीराज मंत्रालय सभी राज्यों में ग्राम पंचायतों का स्वयं के संसाधनों से राजस्व बढ़ाने के लिए 'माडल' देना चाहता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर और लाइसेंस शुल्क वसूली जैसे अधिकार देने होंगे।
6.
गत दिवस राज्यसभा में यह जान जानकारी दी गई कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत दशकों पुराने करीब 2,424 कूड़ा स्थलों में से 701 का कूड़ा हटाया जा चुका है, जबकि 1,179 कूड़े के टीलों को समतल करने का काम अभी प्रगति पर है। इससे यह पता चलता है कि स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए अभी कितना काम किया जाना बाकी है। स्वच्छता को कोई प्रक्रिया या परिणाम न कहकर संस्कार की संज्ञा देना उचित होगा। इसका ज्ञान मुझे अपने श्वसुर जी से मिला था। उन्होंने मुझे सिखाया था कि 'गंदा करना हमारा अधिकार है और साफ करना किसी और की जिम्मेदारी, जब तक यह मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक हमारा देश-समाज तरक्की नहीं कर पाएगा।' स्वच्छता के संस्कार से मेरा अगला साक्षात्कार मेरी विदेश में नियुक्ति के दौरान हुआ, जहां मैंने पाया कि सार्वजनिक स्थलों और यहां तक कि धनी एवं शक्तिशाली लोगों के यहां साफ-सफाई का जिम्मा किसी एक विशेष सामाजिक वर्ग का नहीं था। कई देशों में तो स्कूल और अभिभावक ही बच्चों को यह शिक्षा देते हैं कि पर्यावरण को स्वच्छ रखना उनकी जिम्मेदारी है।
7.
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बीते दिनों टीएन गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले में सुनाया गया फैसला पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नजीर बन गया। दरअसल राजस्थान सरकार ने ओरण जैसे पवित्र वनों को सामान्य वनों की श्रेणी में शामिल करने से इन्कार करते हुए कहा था कि ये क्षेत्र वन की विशेषताओं को पूरा नहीं करते हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से न सिर्फ पवित्र वनों को कानूनी मान्यता मिली है, बल्कि इनका संरक्षण राज्य सरकारों को सामान्य वनों की तरह सुनिश्चित करना होगा। साथ ही इस फैसले ने देश में विभिन्न समुदायों द्वारा पारंपरिक रूप से संरक्षित पवित्र वनों के संरक्षण को महत्ता भी प्रदान की है।
8.
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।' भारतेंदु हरिश्चंद्र जी की इन पंक्तियों में मातृभाषा की महत्ता का नितांत सजीव एवं मर्मस्पर्शी वर्णन किया गया है। वास्तव में मातृभाषा ही किसी व्यक्ति, समाज अथवा राष्ट्र की प्रगति की दृढ़ आधारशिला को निर्मित करती है। किंतु वर्तमान परिदृश्य में उपर्युक्त पंक्तियों की प्रासंगिकता शनैः शनैः अर्थहीन एवं महत्वहीन होती जा रही है। विषय की गंभीरता को समझने के लिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की एक रिपोर्ट पर दृष्टिपात करना नितांत आवश्यक है। यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (ग्लोबल एजुकेशन मानिटरिंग) टीम की ताजा रपट के अनुसार कुल वैश्विक आबादी के 40 प्रतिशत लोगों के पास उस भाषा में शिक्षा हासिल करने की सुविधा नहीं है, जिस भाषा को वे बेहतर ढंग से बोलते, समझते एवं दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं। निःसंदेह यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर चिंता का एक उभरता हुआ विषय है एवं भविष्य में यदि स्थितियां यूं ही बरकरार रहीं तो मातृभाषा का इस प्रकार उपेक्षित होना कहीं न कहीं शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवनयन का कारण बनता हुआ दृष्टिगोचर होगा। समिति द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार कतिपय निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में ऐसे व्यक्तियों का प्रतिशत जो अपनी व्यावहारिक भाषा में शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं, 90 प्रतिशत तक है। विद्यार्थियों के संदर्भ में देखें तो इस समस्या से प्रभावित विद्यार्थियों की संख्या तकरीबन एक अरब है।
9.
हाल में जारी 'आइक्यूएयर' की विश्व वायु गुणवत्ता रपट 2024 में बताया गया है कि 2024 में भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर रहा। 2023 में इस सूची में भारत तीसरे स्थान पर था। दुनिया के के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 भारत में हैं। असम का बर्नीहाट इस सूची में सबसे ऊपर है। बर्नीहाट में प्रदूषण का उच्च स्तर स्थानीय कारखानों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण है। रपट में बताया गया है कि 35 फीसद भारतीय शहरों में वार्षिक पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सीमा पांच माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से दस गुना अधिक है। देश की राजधानी दिल्ली साल भर उच्च वायु प्रदूषण से जूझती है और सर्दियों में यह समस्या और भी बदतर हो जाती है, क्योंकि प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन, धान की पराली जलाने और पटाखों से निकलने वाले धुएं का असर वातावरण पर पड़ता है।
10.
डिजिटल फ्राड के मामलों में कमी लाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआइ) यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआइ पर 'पुल ट्रांजेक्शन' खत्म करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए एनपीसीआइ और बैंकों के बीच प्रारंभिक स्तर की बातचीत चल रही है। अधिकांश डिजिटल फ्राड पुल ट्रांजेक्शन सुविधा का दुरुपयोग होता है और एनपीसीआइ इनमें कमी लाने के लिए इस सुविधा को पूरी तरह से हटाने की संभावना तलाश रहा है।
11.
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने मंगलवार को कहा कि वह 60 दिनों में भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक हैं और इस कदम से दस सालों में द्विपक्षीय व्यापार में 10 गुना वृद्धि होने की उम्मीद है। लगभग दस वर्षों के अंतराल के बाद, भारत और न्यूजीलैंड ने रविवार को आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत फिर से शुरू करने का एलान किया है। वे इस समय भारत दौरे पर हैं।
12.
बिहार, असम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य प्रति वर्ष बाढ़ की आपदा से जूझते हैं। प्राकृतिक आपदाओं को आने से तो नहीं रोका जा सकता, लेकिन उनके दुष्परिणामों से बचाव किया जा सकता है। बाढ़ जैसी आपदा से कितनी जानमाल की हानि होगी यदि इसका अंदाजा समय से लग जाए तो राहत कार्यों के माध्यम से स्थिति नियंत्रित की जा सकती है। ऐसी ही जानकारी के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर आधारित 'डीप फ्लड' एप बनाया है। इसके प्रयोग से एक मिनट में 100 किलोमीटर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
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